⚖️ Indian Landmark Cases Database
AOR Examination Paper-IV | 86 Leading Judgments with Hindi Analysis
86Total Cases
1973Earliest Case
2025Latest Case
11Legal Domains
| # | CASE NAME & CITATION | विषय | मुख्य FINDING / कोर्ट अवलोकन |
|---|---|---|---|
| 1 | Kesavananda Bharati v. State of Kerala [1973] Suppl. SCR 1; (1973) 4 SCC 225 | संविधान | बेसिक स्ट्रक्चर सिद्धांत: संसद संविधान संशोधन कर सकती है, परंतु मूल ढांचे (लोकतंत्र, धर्मनिरपेक्षता, न्यायिक समीक्षा, संघवाद) को नष्ट नहीं कर सकती। अनुच्छेद 368 पर निहित सीमाएँ लागू। |
| 2 | Maneka Gandhi v. Union of India [1978] 2 SCR 621; (1978) 1 SCC 248 | संविधान | अनुच्छेद 21 व्याख्या: 'कानून द्वारा स्थापित प्रक्रिया' उचित, न्यायसंगत और युक्तिसंगत होनी चाहिए। अनुच्छेद 14, 19, 21 का गोल्डन ट्रायंगल। विदेश यात्रा का अधिकार व्यक्तिगत स्वतंत्रता में निहित। |
| 3 | Minerva Mills Ltd. v. Union of India [1981] 1 SCR 206; (1980) 3 SCC 625 | संविधान | FR व DPSP सामंजस्य: मौलिक अधिकार और नीति निदेशक तत्वों के बीच संतुलन मूल संरचना है। न्यायिक समीक्षा को समाप्त करने वाला संशोधन अमान्य। संविधान की सर्वोच्चता बरकरार। |
| 4 | Sharad Birdhi Chand Sarda v. State of Maharashtra [1985] 1 SCR 88; (1984) 4 SCC 116 | आपराधिक | परिस्थितिजन्य साक्ष्य: केवल परिस्थितिजन्य साक्ष्य पर दोषसिद्धि के 5 स्वर्ण सिद्धांत: पूर्ण सिद्धि, केवल दोष की ओर इशारा, निर्दोषता की हर संभावना खारिज, श्रृंखला पूर्ण, कोई विरोधाभास नहीं। |
| 5 | A.R. Antulay v. R.S. Nayak & Anr. [1988] 1 Suppl. SCR 1; (1988) 2 SCC 602 | संविधान | प्राकृतिक न्याय: सुनवाई का अधिकार मौलिक है। उल्लंघन से आदेश शून्य। न्यायालय अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर आदेश नहीं दे सकता। समीक्षा शक्ति स्पष्ट सीमाओं में। |
| 6 | Kihoto Hollohan v. Zachillhu [1992] 1 SCR 686; (1992) Supp 2 SCC 651 | संविधान | दल बदल विरोधी कानून: 10वीं अनुसूची वैध। स्पीकर का निर्णय न्यायिक समीक्षा के अधीन, परंतु अंतरिम चरण में हस्तक्षेप सीमित। राजनीतिक दलों की स्थिरता संविधान के अनुकूल। |
| 7 | Indra Sawhney v. Union of India [1992] 2 Suppl. SCR 454; 1992 Supp (3) SCC 217 | संविधान | आरक्षण सीमा व क्रीमी लेयर: अनुच्छेद 16(4) आरक्षण 50% से अधिक नहीं। OBC में क्रीमी लेयर बाहर। आरक्षण मौलिक अधिकार नहीं। कैरी फॉरवर्ड रूल 50% सीमा के अधीन। |
| 8 | S.R. Bommai v. Union of India [1994] 2 SCR 644; (1994) 3 SCC 1 | संविधान | अनुच्छेद 356 न्यायिक समीक्षा: राष्ट्रपति शासन माला फाइड या अप्रासंगिक आधार पर नहीं। फ्लोर टेस्ट ही बहुमत का एकमात्र विश्वसनीय परीक्षण। धर्मनिरपेक्षता मूल संरचना। |
| 9 | L. Chandra Kumar v. Union of India [1994] 6 Suppl. SCR 261; (1995) 1 SCC 400 | संविधान | न्यायाधिकरण बनाम HC: न्यायाधिकरण HC के पूरक हैं, प्रतिस्थापक नहीं। अनुच्छेद 226/227 शक्ति अहस्तांतरणीय। न्यायाधिकरणों को स्वतंत्रता और योग्यता मानक पूरे करने होंगे। |
| 10 | Vellore Citizens Welfare Forum v. Union of India [1996] 5 Suppl. SCR 241; (1996) 5 SCC 647 | पर्यावरण | सावधानी व प्रदूषक भुगतान: Precautionary Principle व Polluter Pays अनुच्छेद 21 का हिस्सा। सतत विकास संतुलन का उपकरण। उद्योग को पर्यावरण हानि का भार वहन करना होगा। |
| 11 | D.K. Basu v. State of West Bengal [1996] 10 Suppl. SCR 284; (1997) 1 SCC 416 | आपराधिक | गिरफ्तारी दिशा-निर्देश: 11 अनिवार्य नियम: नाम पता वाला मेमो, परिवार/मित्र को सूचना, चिकित्सीय जाँच, वकील से मिलने का अधिकार। हिरासत प्रताड़ना रोकने के लिए कठोर अनुपालन। |
| 12 | Mafatlal Industries Ltd. v. Union of India [1996] 10 Suppl. SCR 585; (1997) 5 SCC 536 | कर | अनुचित enrichment सिद्धांत: कर रिफंड केवल तभी जब कर का भार उपभोक्ता पर न डाला गया हो। सांविधिक प्रावधान सामान्य कानून पर हावी। कर संग्राहक राज्य का ट्रस्टी है। |
| 13 | Vishaka v. State of Rajasthan [1997] 3 Suppl. SCR 404; (1997) 6 SCC 241 | मानवाधिकार | कार्यस्थल यौन उत्पीड़न: विशाखा दिशा-निर्देश जारी। CEDAW का अनुप्रयोग। शिकायत समिति, रोकथाम उपाय, नियोक्ता की जिम्मेदारी। कानून बनने तक ये दिशा-निर्देश बाध्यकारी। |
| 14 | Githa Hariharan v. RBI [1999] 1 SCR 669; (1999) 2 SCC 228 | पारिवारिक | अभिभावकता समानता: हिंदू माइनर एक्ट में 'after' की व्याख्या 'in absence of' के रूप में। माँ पिता की अनुपस्थिति में प्राकृतिक अभिभावक। लैंगिक भेदभाव समाप्त, अनुच्छेद 15 संरक्षण। |
| 15 | Rupa Ashok Hurra v. Ashok Hurra [2002] 2 SCR 1006; (2002) 4 SCC 388 | प्रक्रिया | क्यूरेटिव याचिका: रिव्यू खारिज के बाद अंतिम न्यायिक उपाय। प्राकृतिक न्याय उल्लंघन या गंभीर पूर्वाग्रह में फाइल। 3 वरिष्ठतम न्यायाधीशों की बेंच। दुर्लभतम मामलों में ही स्वीकार्य। |
| 16 | Pradeep Kumar Biswas v. IICB [2002] 3 SCR 100; (2002) 5 SCC 111 | संविधान | 'राज्य' परिभाषा विस्तार: अनुच्छेद 12 के तहत वित्तीय, कार्यात्मक, प्रशासनिक नियंत्रण आधार पर संस्थाएँ 'राज्य'। मौलिक अधिकारों का क्षैतिज प्रभाव संभव। सार्वजनिक कर्तव्य निर्वहन महत्वपूर्ण। |
| 17 | P. Rama Chandra Rao v. State of Karnataka [2002] 3 SCR 60; (2002) 4 SCC 578 | संविधान | संशोधन शक्ति सीमा: संसद की शक्ति मूल संरचना को छू नहीं सकती। न्यायिक समीक्षा और मौलिक अधिकार अभिन्न अंग। संविधान की सर्वोच्चता बनाए रखने के लिए न्यायपालिका सतर्क। |
| 18 | T.M.A. Pai Foundation v. State of Karnataka [2002] 3 Suppl. SCR 587; (2002) 8 SCC 481 | शिक्षा | अल्पसंख्यक संस्थान स्वायत्तता: अनुच्छेद 30(1) प्रवेश व शुल्क निर्धारण में स्वायत्तता देता है। राज्य नियमन केवल उचित हित/मानक बनाए रखने के लिए। व्यावसायीकरण रोकना आवश्यक। |
| 19 | P.A. Inamdar v. State of Maharashtra (2004) 8 SCC 139 | आरक्षण | अल्पसंख्यक संस्थानों में आरक्षण: राज्य-प्रायोजित आरक्षण 30(1) वाले संस्थानों पर लागू नहीं। अनुच्छेद 15(5) के बावजूद अल्पसंख्यक अधिकार सुरक्षित। गुणवत्ता और समानता संतुलन। |
| 20 | Technip SA v. SMS Holding [2005] 1 Suppl. SCR 223; (2005) 5 SCC 465 | कंपनी | विदेशी विलय/अधिग्रहण: RBI/FEMA अनुमोदन अनिवार्य। कंपनी अधिनियम व विदेशी मुद्रा कानून समन्वय। राष्ट्रीय हित व पारदर्शिता प्राथमिक। विदेशी निवेशक अधिकार संरक्षित। |
| 21 | S.B.P. & Co. v. Patel Engineering [2005] 4 Suppl. SCR 688; (2005) 8 SCC 618 | मध्यस्थता | मुख्य न्यायाधीश की भूमिका: अनुच्छेद 11 नियुक्ति 'न्यायिक' कार्य है, प्रशासनिक नहीं। HC/SC हस्तक्षेप सीमित। मध्यस्थता समझौते की वैधता प्राथमिक जाँच योग्य। |
| 22 | Rameshwar Prasad v. Union of India [2006] 1 SCR 562; (2006) 2 SCC 1 | चुनाव | विधानसभा भंग शक्ति: राज्यपाल/राष्ट्रपति शक्ति संवैधानिक, परंतु दुरुपयोग नहीं। न्यायिक समीक्षा उपलब्ध यदि mala fide या असंवैधानिक उद्देश्य। लोकतांत्रिक स्थिरता प्राथमिक। |
| 23 | I.R. Coelho v. State of Tamil Nadu [2007] 1 SCR 706; (2007) 2 SCC 1 | संविधान | 9वीं अनुसूची न्यायिक समीक्षा: 9वीं अनुसूची में डाले कानून भी बेसिक स्ट्रक्चर टेस्ट के अधीन। 1973 के बाद के संशोधन स्वतः संरक्षित नहीं। न्यायपालिका अंतिम संरक्षक। |
| 24 | Common Cause v. Union of India [2008] 6 SCR 262; (2008) 5 SCC 511 | आपराधिक | जमानत सिद्धांत: जमानत नियम, अपवाद नहीं। देरी से मुकदमा चलना जमानत आधार। अनुच्छेद 21 उल्लंघन रोकने के लिए त्वरित सुनवाई। कैद अवधि कटौती स्पष्ट। |
| 25 | State of West Bengal v. CPDR [2010] 2 SCR 979; (2010) 3 SCC 571 | मानवाधिकार | विरोध प्रदर्शन अधिकार: शांतिपूर्ण विरोध अनुच्छेद 19(1)(a) व 19(1)(b) संरक्षित। राज्य को सुरक्षा व सुविधा सुनिश्चित करनी होगी। अतिरिक्त प्रतिबंध असंवैधानिक। |
| 26 | Selvi v. State of Karnataka [2010] 5 SCR 381; (2010) 7 SCC 263 | आपराधिक | वैज्ञानिक जाँच सीमाएँ: नार्को, पॉलीग्राफ, BEAP बिना स्वैच्छिक सहमति निषिद्ध। अनुच्छेद 20(3) स्व-अपराधीकरण सुरक्षा। मानसिक गोपनीयता अनुच्छेद 21 में निहित। |
| 27 | Re: Special Reference No. 1 of 2012 [2012] 9 SCR 311; (2012) 10 SCC 1 | संविधान | 2G स्पेक्ट्रम रद्दीकरण: राष्ट्रपति संदर्भ पर सलाहकार अधिकार क्षेत्र। प्राकृतिक संसाधन सार्वजनिक ट्रस्ट। पारदर्शिता, नीलामी, समान अवसर अनिवार्य। मनमाना आवंटन अमान्य। |
| 28 | Republic of Italy v. Union of India [2013] 4 SCR 595; (2013) 4 SCC 721 | अंतर्राष्ट्रीय | एनरोनी क्षेत्राधिकार: अंतर्राष्ट्रीय जलसीमा व UNCLOS लागू। क्षेत्राधिकार टकराव में न्यायाधिकरण गठन। राजनयिक संवाद व अंतर्राष्ट्रीय कानून प्राथमिक। भारतीय न्यायालय सीमित हस्तक्षेप। |
| 29 | Novartis AG v. Union of India [2013] 13 SCR 148; (2013) 6 SCC 1 | पेटेंट | धारा 3(d) वैधता: दवाओं के नए रूपों पर पेटेंट के लिए 'उन्नत दक्षता' साबित करनी होगी। एवरग्रीनिंग रोकी गई। TRIPS लचीलापन सार्वजनिक स्वास्थ्य हित में। जनरिक दवाएँ संरक्षित। |
| 30 | Dr. Balram Prasad v. Dr. Kunal Saha [2013] 12 SCR 30; (2014) 1 SCC 384 | चिकित्सा | चिकित्सा लापरवाही मुआवजा: उपभोक्ता फोरम अधिकार क्षेत्र स्पष्ट। उच्च मुआवजा पीड़ित राहत व डिटेरेंट के लिए। चिकित्सीय मानक उल्लंघन गंभीर। विशेषज्ञ समिति राय बाध्यकारी नहीं, परंतु महत्वपूर्ण। |
| 31 | Lalita Kumari v. Govt. of U.P. [2013] 14 SCR 713; (2014) 2 SCC 1 | आपराधिक | FIR अनिवार्यता: संज्ञेय अपराध में FIR दर्ज करना बाध्यकारी। प्रारंभिक जाँच अत्यंत सीमित मामलों में। विलंब/इनकार दंडनीय। पीड़ित अधिकार व पुलिस जिम्मेदारी स्पष्ट। |
| 32 | NALSA v. Union of India [2014] 5 SCR 119; (2014) 5 SCC 438 | मानवाधिकार | तृतीय लिंग मान्यता: ट्रांसजेंडर व्यक्ति तृतीय लिंग। अनुच्छेद 14, 15, 19, 21 समान अधिकार। आरक्षण, स्वास्थ्य, शिक्षा, पहचान दस्तावेज निर्देश। सामाजिक न्याय प्राथमिक। |
| 33 | Pramati Educational Trust v. Union of India [2014] 11 SCR 712; (2014) 8 SCC 1 | शिक्षा | RTE आरक्षण छूट: 30(1) वाले अल्पसंख्यक संस्थान RTE एक्ट 12(1)(c) से छूट। सहायता प्राप्त/अप्राप्त में अंतर। शिक्षा का अधिकार व अल्पसंख्यक अधिकार संतुलन। |
| 34 | Kailash Nath Associates v. DDA [2015] 1 SCR 627; (2015) 4 SCC 136 | नागरिक | अनुबंध जुर्माना सीमा: भंग पर जुर्माना वास्तविक नुकसान के अनुपात में। अनुचित जुर्माना वसूली नहीं। भारतीय अनुबंध अधिनियम धारा 74 व्याख्या। दंड बनाम पूर्वानुमानित नुकसान स्पष्ट। |
| 35 | Shreya Singhal v. Union of India [2015] 5 SCR 963; (2015) 5 SCC 1 | आईटी | धारा 66A असंवैधानिक: अस्पष्ट व अतिव्यापी होने के कारण रद्द। ऑनलाइन अभिव्यक्ति स्वतंत्रता संरक्षित। इंटरमीडियरी गाइडलाइंस स्पष्ट। ज्ञान/इरादा आधारित जिम्मेदारी। |
| 36 | SC AOR Association v. Union of India [2015] 13 SCR 1; 2016 (5) SCC 1 | न्यायपालिका | NJAC असंवैधानिक: NJAC अधिनियम रद्द। कॉलेजियम बहाल। न्यायिक स्वतंत्रता मूल संरचना। कार्यपालिका हस्तक्षेप सीमित। पारदर्शिता व मेरिट आधारित नियुक्ति आवश्यक। |
| 37 | Union of India v. V. Sriharan [2015] 14 SCR 613; 2016 (7) SCC 1 | आपराधिक | आजीवन कारावास व्याख्या: 'पूरी प्राकृतिक आयु' तक कैद संभव। मृत्युदंड पुष्टि/रूपांतरण में SC भूमिका। दुर्लभतम के दुर्लभ सिद्धांत। समाज हित व पीड़ित न्याय प्राथमिक। |
| 38 | Gujarat Urja Vikas v. EMCO [2016] 1 SCR 857; (2016) 11 SCC 182 | मध्यस्थता | धारा 34 चुनौती सीमा: पंचाट को चुनौती केवल निर्धारित आधारों पर। पुनर्विचार निषिद्ध। न्यायालय हस्तक्षेप अत्यंत संकुचित। मध्यस्थता स्वायत्तता सम्मानित। |
| 39 | Mukesh v. State (NCT Delhi) [2017] 6 SCR 1; (2017) 6 SCC 1 | आपराधिक | 2012 दिल्ली दुष्कर्म मामला: मृत्युदंड पुष्टि। दुर्लभतम के दुर्लभ श्रेणी। पीड़ित गरिमा व समाज संदेश प्राथमिक। विलंब दया याचिका में ध्यान योग्य। कानून का भय आवश्यक। |
| 40 | Excel Crop Care v. CCI [2017] 5 SCR 901; (2017) 8 SCC 47 | प्रतिस्पर्धा | CCI जुर्माना अनुपात: जुर्माना लाभ या टर्नओवर आधारित गणना स्पष्ट। अनुपातहीनता निषिद्ध। प्रतिस्पर्धा संरक्षण व उपभोक्ता हित संतुलन। दंड उद्देश्य सुधारात्मक। |
| 41 | Common Cause v. Union of India [2017] 13 SCR 361; (2017) 9 SCC 499 | संविधान | निष्क्रिय यूथेनेसिया वैध: लिविंग विल के तहत जीवन समर्थन हटाना वैध। प्राकृतिक मृत्यु अधिकार अनुच्छेद 21 में। गरिमापूर्ण अंत जीवन प्राथमिक। चिकित्सीय बोझ कम करना नैतिक। |
| 42 | Shayara Bano v. Union of India [2017] 9 SCR 797; (2017) 9 SCC 1 | पारिवारिक | त्रिपल तलाक असंवैधानिक: तत्काल तलाक मनमाना व इस्लाम सिद्धांत विरुद्ध। मुस्लिम महिला अधिकार संरक्षित। समानता व गरिमा प्राथमिक। विधानी सुधार आवश्यक। |
| 43 | K.S. Puttaswamy v. Union of India [2017] 10 SCR 569; (2017) 10 SCC 1 | संविधान | गोपनीयता मौलिक अधिकार: अनुच्छेद 21 व भाग III अभिन्न अंग। डेटा संरक्षण, सर्विलांस नियंत्रण अनिवार्य। आनुपातिकता व कानून का शासन लागू। डिजिटल युग में संरक्षण आवश्यक। |
| 44 | Common Cause v. Union of India [2018] 6 SCR 1; 2018 (5) SCC 1 | संविधान | लिविंग विल कार्यान्वयन: विस्तृत दिशा-निर्देश जारी। मेडिकल बोर्ड, जिलाधिकारी भूमिका स्पष्ट। प्रक्रिया सरल बनाई गई। रोगी स्वायत्तता सम्मानित। परिवार सहमति महत्वपूर्ण। |
| 45 | MC Ujjain v. BVG India [2018] 6 SCR 861; 2018 (5) SCC 462 | सेवा | ठेका कर्मचारी समान वेतन: समान काम, समान वेतन सिद्धांत लागू। नियमित/ठेका भेदभाव निषिद्ध। शोषण रोकना राज्य कर्तव्य। न्यूनतम वेतन व सुरक्षा अनिवार्य। |
| 46 | Shakti Vahini v. Union of India [2018] 3 SCR 770; (2018) 7 SCC 192 | मानवाधिकार | ऑनर किलिंग रोकथाम: प्रेम विवाह में हस्तक्षेप गंभीर अपराध। पुलिस संरक्षण अनिवार्य। विशेष दिशा-निर्देश जारी। व्यक्तिगत Choice संवैधानिक अधिकार। सामाजिक रूढ़िवादिता निषिद्ध। |
| 47 | Navtej Singh Johar v. Union of India [2018] 7 SCR 379; (2018) 10 SCC 1 | संविधान | धारा 377 रद्द: सहमति वाले समलैंगिक संबंध अपराध नहीं। अनुच्छेद 14, 15, 19, 21 उल्लंघन। LGBTQ+ अधिकार मान्य। यौन अभिविन्यास निजी मामला। समावेशी समाज लक्ष्य। |
| 48 | K.S. Puttaswamy (Aadhaar) v. Union of India [2018] 8 SCR 1; (2019) 1 SCC 1 | संविधान | आधार वैधता व सीमाएँ: आधार वैध, परंतु निजी कंपनियों के लिए अनिवार्य नहीं। डेटा संरक्षण उपाय अनिवार्य। मेटाडेटा सीमित उपयोग। गोपनीयता व पहचान संतुलन। |
| 49 | Jarnail Singh v. Lachhmi Narain Gupta [2018] 10 SCR 663; (2018) 10 SCC 396 | आरक्षण | पदोन्नति आरक्षण व क्रीमी लेयर: SC/ST पदोन्नति आरक्षण में क्रीमी लेयर लागू। 77वाँ संशोधन वैध। बैकलॉग भरने की सीमाएँ स्पष्ट। सामाजिक न्याय व दक्षता संतुलन। |
| 50 | Joseph Shine v. Union of India [2018] 11 SCR 765; (2019) 3 SCC 39 | आपराधिक | व्यभिचार अपराध नहीं: धारा 497 असंवैधानिक। महिलाओं को संपत्ति नहीं, समान नागरिक माना जाएगा। विवाह समान भागीदारी। आपराधिक दंड निजी संबंधों में अनुचित। |
| 51 | CCI v. Bharti Airtel [2018] 14 SCR 489; (2019) 2 SCC 521 | प्रतिस्पर्धा | CCI व TRAI क्षेत्राधिकार: सेक्टरल रेगुलेटर प्राथमिक। TRAI राय के बाद ही CCI हस्तक्षेप। विशेष कानून सामान्य पर हावी। दूरसंचार प्रतिस्पर्धा संरक्षित। |
| 52 | Swiss Ribbons v. Union of India [2019] 3 SCR 535; (2019) 4 SCC 17 | दिवालियापन | IBC संवैधानिक वैध: वित्तीय व परिचालन लेनदार भेद वैध। समयबद्ध निपटान लक्ष्य। कोरल इंस्पिरास सिद्धांत पुष्टि। आर्थिक स्थिरता प्राथमिक। न्यायिक हस्तक्षेप सीमित। |
| 53 | Ssangyong v. NHAI [2019] 7 SCR 522; 2019 (15) SCC 131 | मध्यस्थता | पब्लिक पॉलिसी संकुचित: धारा 34 में हस्तक्षेप केवल गंभीर अनियमितता में। तथ्य पुनर्विचार निषिद्ध। मध्यस्थता अंतिमता सम्मानित। व्यावसायिक निश्चितता प्राथमिक। |
| 54 | Dr. Ashwani Kumar v. Union of India [2019] 12 SCR 30; 2019 SCC Online SC 1144 | संविधान | CVC शक्तियाँ व पारदर्शिता: सतर्कता आयुक्त भूमिका स्पष्ट। जाँच प्रक्रिया में पारदर्शिता अनिवार्य। सरकारी अधिकारी जवाबदेही बढ़ाई गई। भ्रष्टाचार रोकथाम प्राथमिक। |
| 55 | Rojer Mathew v. South Indian Bank [2019] 16 SCR 1; (2020) 6 SCC 1 | न्यायाधिकरण | वित्त अधिनियम 2017 वैध: न्यायाधिकरण पुनर्गठन मान्य। कार्यपालिका को नियम बनाने में न्यायिक स्वतंत्रता सम्मानित। सदस्य योग्यता व कार्यकाल स्पष्ट। दक्षता लक्ष्य। |
| 56 | CPIO SC v. Subhash Chandra Agarwal [2019] 16 SCR 424; (2020) 5 SCC 481 | RTI | CJI कार्यालय RTI दायरे में: न्यायिक स्वतंत्रता व पारदर्शिता संतुलन। जानकारी साझा करने में सावधानी। प्रशासनिक कार्य पारदर्शी। न्यायिक गोपनीयता संरक्षित। |
| 57 | Essar Steel v. Satish Kumar Gupta [2019] 16 SCR 275; (2020) 8 SCC 531 | दिवालियापन | CoC वाणिज्यिक निर्णय: न्यायिक समीक्षा से परे, सिवाय mala fide/कानून उल्लंघन के। वित्तीय लेनदार प्राथमिकता स्पष्ट। समयबद्ध निपटान लक्ष्य। आर्थिक पुनर्जीवन प्राथमिक। |
| 58 | Shanti Conductors v. Assam SEB [2019] 16 SCR 252; (2020) 2 SCC 677 | मध्यस्थता | ब्याज दर निर्धारण: पंचाट ब्याज दर तय कर सकती है। अनुबंध स्वतंत्रता सम्मानित। न्यायालय हस्तक्षेप केवल धारा 34 आधारों पर। वाणिज्यिक निश्चितता प्राथमिक। |
| 59 | Keisham Meghachandra v. Speaker Manipur [2020] 2 SCR 132; 2020 (2) SCALE 329 | संविधान | दल बदल समयसीमा: स्पीकर को 3 महीने में निर्णय। विलंब न्यायिक हस्तक्षेप आधार। तटस्थ प्राधिकरण सिफारिश। राजनीतिक स्थिरता प्राथमिक। प्रक्रियात्मक न्याय अनिवार्य। |
| 60 | Sushila Aggarwal v. State (NCT Delhi) [2020] 2 SCR 1; (2020) 5 SCC 1 | आपराधिक | जमानत शर्तें लचीली: जाँच पूर्ति पर जमानत रद्द करना कठिन। अनुच्छेद 21 स्वतंत्रता संरक्षित। व्यक्तिगत परिस्थितियाँ ध्यान योग्य। न्यायिक विवेक संतुलित। |
| 61 | Dheeraj Mor v. HC Delhi [2020] 2 SCR 161; (2020) 7 SCC 401 | विधिक शिक्षा | कानून प्रवेश परीक्षाएँ वैध: 5 वर्षीय एकीकृत कार्यक्रम में AILET/CLAT मान्य। मानक व योग्यता स्पष्ट। गुणवत्ता शिक्षा लक्ष्य। प्रतिस्पर्धी चयन आवश्यक। |
| 62 | IAMAI v. RBI [2020] 2 SCR 297; (2020) 10 SCC 274 | बैंकिंग | क्रिप्टो प्रतिबंध असंवैधानिक: आनुपातिकता सिद्धांत लागू। व्यापार/पेशे स्वतंत्रता (अनुच्छेद 19(1)(g)) संरक्षित। RBI विनियमन सीमित। नवाचार व जोखिम संतुलन। |
| 63 | Indore Dev Authority v. Manoharlal [2020] 3 SCR 1; (2020) 8 SCC 129 | भूमि | RFCTLARR Act व्याख्या: भूमि अधिग्रहण में मुआवजा व पुनर्विकास अनिवार्य। 2013 अधिनियम पुराने मामलों में सीमित लागू। पीड़ित पुनर्वास प्राथमिक। न्यायिक हस्तक्षेप संतुलित। |
| 64 | Madras Bar Assn v. Union of India [2020] 2 SCR 246; 2020 (13) SCALE 443 | न्यायाधिकरण | NCLT सुधार: सदस्य नियुक्ति व कार्यकाल सुधार। 2 वर्ष न्यूनतम कार्यकाल। न्यायिक/तकनीकी संतुलन। दक्षता व निष्पक्षता लक्ष्य। पारदर्शिता अनिवार्य। |
| 65 | Nandini Sundar v. State of Chhattisgarh [2011] 8 SCR 1028; (2011) 7 SCC 547 | मानवाधिकार | सलवा जुडुम असंवैधानिक: नागरिक सशस्त्र बल निषिद्ध। आदिवासी सुरक्षा व विकास राज्य कर्तव्य। अनुच्छेद 21 उल्लंघन रोकना आवश्यक। मानवाधिकार प्राथमिक। |
| 66 | Arnesh Kumar v. State of Bihar [2014] 8 SCR 128; (2014) 8 SCC 273 | आपराधिक | धारा 498A गिरफ्तारी दिशा-निर्देश: 9 बिंदु जाँच अनिवार्य। तुरंत गिरफ्तारी निषिद्ध। दुरुपयोग रोकथाम उपाय। पुलिस विवेक संतुलित। महिला संरक्षण व पुरुष अधिकार संतुलन। |
| 67 | Abhiram Singh v. C.D. Commachen [2017] 1 SCR 158; (2017) 2 SCC 629 | चुनाव | धर्म/जाति प्रचार प्रतिबंध: धारा 123(3) व्यापक व्याख्या। धर्मनिरपेक्ष चुनाव प्रक्रिया अनिवार्य। समान अवसर लक्ष्य। सांप्रदायिकता रोकना प्राथमिक। |
| 68 | Neeraj Dutta v. State (NCT Delhi) [2022] 5 SCR 104; (2023) 4 SCC 731 | आपराधिक | ट्रैप एविडेंस सावधानियाँ: लुभाने वाले साक्ष्य में पूर्व संदेह व प्रक्रियात्मक सावधानियाँ अनिवार्य। संदेह लाभ आरोपी को। भ्रष्टाचार जाँच पारदर्शी। न्यायिक सतर्कता आवश्यक। |
| 69 | Sukhpal Singh Khaira v. State of Punjab [2022] 10 SCR 156; (2023) 1 SCC 289 | आपराधिक | जमानत विलंब सिद्धांत: धारा 437/439 CrPC तहत विलंब जमानत आधार। जाँच पूर्ति महत्वपूर्ण। अनुच्छेद 21 स्वतंत्रता संरक्षित। न्यायिक विवेक संतुलित। |
| 70 | Satender Kumar Antil v. CBI [2022] 10 SCR 351; (2022) 10 SCC 51 | आपराधिक | गिरफ्तारी से बचाव 4 श्रेणियाँ: जमानत योग्य अपराधों में गिरफ्तारी नहीं। डिजिटल प्रक्रिया व अनुपालन रिपोर्ट अनिवार्य। व्यक्तिगत स्वतंत्रता प्राथमिक। पुलिस जिम्मेदारी स्पष्ट। |
| 71 | Janhit Abhiyan v. Union of India [2022] 14 SCR 1; (2023) 5 SCC 1 | संविधान | EWS आरक्षण वैध: 103वाँ संशोधन मान्य। आर्थिक आधार आरक्षण मूल संरचना उल्लंघन नहीं। 50% सीमा अपवाद। सामाजिक न्याय विस्तारित। आनुपातिकता लागू। |
| 72 | Shilpa Sailesh v. Varun Sreenivasan [2023] 5 SCR 165; (2023) 14 SCC 231 | पारिवारिक | पारस्परिक तलाक प्रतीक्षा माफ: धारा 13B(2) अवधि अनुच्छेद 142 तहत माफ संभव। टूटा विवाह बनाए रखना अनुचित। न्यायिक विवेक से राहत। मानवीय संवेदना प्राथमिक। |
| 73 | Kaushal Kishor v. State of UP [2023] 8 SCR 581; (2023) 4 SCC 1 | संविधान | मौलिक अधिकार क्षैतिज प्रभाव: अधिकार केवल राज्य नहीं, बड़े व्यक्तियों/निगमों के खिलाफ भी लागू। अनुच्छेद 19/21 विस्तृत व्याख्या। नागरिक संरक्षण बढ़ाया गया। |
| 74 | Subhash Desai v. State of Maharashtra [2023] 8 SCR 857; (2024) 2 SCC 719 | संविधान | राष्ट्रपति शासन प्रक्रिया: बहुमत परीक्षण व राज्यपाल भूमिका स्पष्ट। S.R. Bommai सिद्धांत पुष्टि। न्यायिक समीक्षा उपलब्ध। लोकतांत्रिक स्थिरता प्राथमिक। |
| 75 | Cox & Kings v. SAP India [2023] 15 SCR 621; (2024) 4 SCC 1 | मध्यस्थता | अंतरिम राहत व पंचाट शक्ति: धारा 9/17 समन्वय स्पष्ट। न्यायालय व मध्यस्थ क्षेत्राधिकार संतुलित। व्यावसायिक निश्चितता प्राथमिक। प्रक्रियात्मक न्याय अनिवार्य। |
| 76 | In re: Arbitration & Stamp Act [2023] 15 SCR 1081; (2024) 6 SCC 1 | मध्यस्थता | स्टाम्प शुल्क अनिवार्यता: बिना पर्याप्त स्टाम्प समझौता अयोग्य। भुगतान तक पंचात रुकेगी। संविधान पीठ निर्णय। राजस्व हित व मध्यस्थता संतुलन। |
| 77 | In re: Article 370 [2023] 16 SCR 1; 2023 SCC OnLine SC 1647 | संविधान | अनुच्छेद 370 रद्दीकरण वैध: विशेष दर्जा समाप्त। संसद शक्ति व राष्ट्रपति घोषणा मान्य। एकीकरण लक्ष्य। संवैधानिक प्रक्रिया पूर्ण। न्यायिक हस्तक्षेप सीमित। |
| 78 | ADR v. UOI (Electoral Bonds) [2024] 2 SCR 420; (2024) 5 SCC 1 | चुनाव | इलेक्टोरल बॉन्ड असंवैधानिक: मतदाता जानकारी अधिकार (अनुच्छेद 19(1)(a)) प्राथमिक। पारदर्शिता अनिवार्य। धन शक्ति प्रभाव रोका जाएगा। डेटा सार्वजनिक होगा। |
| 79 | Kavita Kamboj v. HC Punjab & Haryana [2024] 2 SCR 1136; (2024) 7 SCC 103 | न्यायपालिका | न्यायाधीश नियुक्ति प्रक्रिया: कॉलेजियम सिफारिश व सरकार भूमिका स्पष्ट। पारदर्शिता व समयबद्धता अनिवार्य। न्यायिक स्वतंत्रता बनाए रखनी होगी। योग्यता प्राथमिक। |
| 80 | Sita Soren v. Union of India [2024] 3 SCR 462; (2024) 5 SCC 629 | संविधान | विधायक प्रतिरक्षा सीमा: अनुच्छेद 105(2)/194(2) केवल सदन कार्य के लिए। रिश्वत में प्रतिरक्षा नहीं। P.V. Narasimha Rao पुनर्विचार। भ्रष्टाचार निषिद्ध। |
| 81 | State (NCT Delhi) v. BSK Realtors [2024] 5 SCR 1159; (2024) 7 SCC 370 | भूमि | DDA भूमि नीति: पट्टा धारक अधिकार संरक्षित। पुनर्विकास नियम स्पष्ट। न्यायिक हस्तक्षेप सीमित। नियामक प्रावधान प्राथमिक। न्यायसंगत मुआवजा आवश्यक। |
| 82 | MADA v. SAIL [2024] 7 SCR 1549; (2024) 10 SCC 1 | कर | खनिज शुल्क क्षेत्राधिकार: राज्य सरकार शक्ति स्पष्ट। सातवीं अनुसूची व वित्तीय संघवाद संतुलन। GST व खनन कर टकराव समाधान। राजस्व हित संरक्षित। |
| 83 | State of Punjab v. Davinder Singh [2024] 8 SCR 1321; (2025) 1 SCC 1 | आरक्षण | उप-वर्गीकरण वैध: SC/ST आरक्षण में sub-classification मान्य। सबसे पिछड़े समूहों को न्यायसंगत हिस्सा। अनुच्छेद 14/16 संतुलन। सामाजिक न्याय विस्तारित। |
| 84 | AMU v. Naresh Agarwal 2024 SCC OnLine SC 3213 | शिक्षा | AMU अल्पसंख्यक दर्जा: अनुच्छेद 30(1) संरक्षण लागू। प्रवेश व प्रशासन स्वायत्तता। शैक्षणिक मानक बनाए रखने होंगे। संवैधानिक संरक्षण स्पष्ट। |
| 85 | Property Owners Assn v. State of Maharashtra [2024] 11 SCR 1; 2024 SCC OnLine SC 3122 | संविधान | संपत्ति अधिकार व्याख्या: जमींदारी उन्मूलन व 31A/31B स्पष्ट। कानूनी सुधार व मुआवजा सिद्धांत संतुलित। आर्थिक न्याय प्राथमिक। न्यायिक हस्तक्षेप सीमित। |
| 86 | Tej Prakash Pathak v. HC Rajasthan [2024] 12 SCR 28; (2025) 2 SCC 1 | न्यायपालिका | न्यायाधीश स्थानांतरण व अनुशासन: कॉलेजियम प्रक्रिया व सरकार सहमति स्पष्ट। न्यायिक स्वतंत्रता बनाम जवाबदेही संतुलन। पारदर्शिता अनिवार्य। योग्यता प्राथमिक। |
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